सोमवार, 13 जून 2016

कौसानी

घुमावदार रास्तें
स्वागत करते लम्बें पेड़
अपनी ओर बुलाते पहाड़
लगातार बोलते झिंगुर
चहचहाते पक्षी
क्या कोई इसका सानी हैं
जी हाँ, शहर ये कौसानी है 
दूर से छुप छुप लुभाता हिम
गरजते बादल
कड़कती बिजली 
जम के बरसने को आतुर 
मौसम ये रोमानी हैं 
जी हाँ, शहर ये कौसानी हैं
शांत,नीरव, मनभावन
हवा में कैसा जादू हैं
भीगे मन,भीगे तन
पत्ते पत्ते में संगीत हैं
सुबह है सुंदर
तो रैना भी दीवानी हैं
जी हाँ, शहर ये कौसानी हैं
अलसुबह की किरणें
हिम पे जा गिरती
भुला देती सुध बुध
लेकिन 
उड़ते आवारा ये बादल
ढ़क देते इसकी सुनहरी छँटा 
ये बात कितनी बेमानी हैं
जी हाँ, शहर ये कौसानी हैं।



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